Friday, 28 August 2015


फैमिली परिचय

एक आदमी ने अपने
परिवार का परिचय इस तरह कराया:-
1. ई है हमार बीवी ..... 
गूगल रानी ... 
एक सवाल पूछो तो 10 जवाब देती है...!!!
2. ई है हमार बेटवा ...
फेसबुक कुमार ... 
घर की बात सारे कॉलोनी तक पहुंचाता है ...!!!
3. ई है हमार बिटिया .... 
ट्विटर कुमारी ...
पूरी कॉलोनी इसको फॉलो करती है...!!!
4. ई है हमार अम्माजी .. 
व्हाट्सप्प माता - 
पूरा दिन बड -बड करती रहती है ..
मगर काम की एक्कौ बात नहीं निकालती .!
5. और हम ,
ऑरकुट कुमार ... 
हमका कोई पूछता ही नहीं ...!!


एल.एल.बी. की पढ़ाई...
प्रोफेसर : "अगर तुम्हें किसी को संतरा देना हो तो क्या बोलोगे...?
छात्र : "ये संतरा लो।
प्रोफेसर : नहीं... एक वकील की तरह बोलो...।
छात्र : मैं एतद् द्वारा, अपनी पूरी रुचि व होशो-हवास में और बिना किसी के दबाव में आए इस फल, जो कि संतरा कहलाता है, और जिस पर मैं पूरा मालिकाना हक़ रखता हूँ, को उसके छिलके, रस, गूदे और बीज सहित आपको देता हूँ और इसके साथ ही आपको इस बात सम्पूर्ण व बिना शर्त अधिकार भी देता हूँ कि आप इसे काटने, छीलने, फ्रिज में रखने या खाने के लिये पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
आप यह अधिकार भी रखेंगे कि आप किसी भी अन्य व्यक्ति को यह फल इसके छिलके, रस, गूदे और बीज के बिना या उसके साथ दे सकते हैं।
मैं घोषणा करता हूं कि आज से पहले इस संतरे से संबंधित किसी भी प्रकार के वाद विवाद, झगड़े की समस्त जिम्मेदारी मेरी है।
और
अब के बाद मेरा किसी भी प्रकार से इस संतरे से कोई सम्बन्ध नहीं रह जाएगा...।
प्रोफेसर : प्रभु आपके चरण कहाँ हैं...?


बचपन कि ये लाइन्स .जिन्हे हम दिल से गाते गुनगुनाते थे ..

और खेल खेलते थे ..!! तो याद ताज़ा कर लीजिये ...!!
▶ मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है।
हाथ लगाओ डर जायेगी बाहर निकालो मर जायेगी।
************
▶ पोशम्पा भाई पोशम्पा सौ रुपये की घडी चुराई।
अब तो जेल मे जाना पडेगा, जेल की रोटी खानी पडेगी,
जेल का पानी पीना पडेगा। थै थैयाप्पा थुशमदारी बाबा खुश।
************
▶ आलू-कचालू बेटा कहाँ गये थे, बन्दर की झोपडी मे सो रहे थे।
बन्दर ने लात मारी रो रहे थे, मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे।
**************
▶ आज सोमवार है, चूहे को बुखार है।
चूहा गया डाक्टर के पास, डाक्टर ने लगायी सुई,
चूहा बोला उईईईईई।
************
▶ झूठ बोलना पाप है, नदी किनारे सांप है।
काली माई आयेगी, तुमको उठा ले जायेगी।
************
▶ चन्दा मामा दूर के, पूए पकाये भूर के।
आप खाएं थाली मे, मुन्ने को दे प्याली में।
************
▶ तितली उड़ी, बस मे चढी।
सीट ना मिली, तो रोने लगी।
ड्राईवर बोला, आजा मेरे पास,
तितली बोली ” हट बदमाश “।
******************
▶ मोटू सेठ, पलंग पर लेट ,
गाडी आई, फट गया पेट
********************
रंगों और आत्मीय मिलन के त्यौहार होली की आपको हार्दिक शुभकामनाएँ।
हुड़दंग से ज़्यादा परस्पर मिलाप मे त्यौहार की खूबसूरती है और एफ़बी पर होली की शुभकामनाएँ देना तो कुछ यूं लगता है। जैसे :
ये इनायतें गजब कीं...... 
ये बला की मेहरबानी ,
मेरी खैरियत भी पूछी....... 
किसी और की ज़बानी...
एक बार फिर से होली की ढेरों शुभकामनाएँ।

उसकी धाक.. एक-दो पे नहीं , सैंकड़ों पे थी| और गिनती भी उसकी शहर के बड़ों बड़ों में थी| दफन.. केवल..छ: फिट के गड्डे में कर दिया उसको ! जबकि.... ज़मीन उसके नाम तो कई एकड़ों में थी....||


Gyan Ki Baatein


1:- इस बात को व्यक्त मत होने दीजिये कि आपने क्या करने के लिए सोचा है, बुद्धिमानी से इसे रहस्य बनाये रखिए और इस काम को करने के लिए दृढ रहिए। -

2:- शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पता है। शिक्षा सौंदर्य और यौवन को परास्त कर देती है।

3:- मूर्खता के समान यौवन भी दुखदायी होता है क्योंकि जवानी में व्यक्ति कामवासना के आवेग में कोई भी मूर्खतापूर्ण कार्य कर सकता है। परंतु इनसे भी अधिक कष्टदायक है दूसरों पर आश्रित रहना। 

4:- अगर सांप जहरीला ना भी हो तो उसे खुद को जहरीला दिखाना चाहिए। 

5:- वे माता-पिता अपने बच्चों के लिए शत्रु के समान हैं, जिन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दी। क्योंकि अनपढ़ बालक का विद्वानों के समूह में उसी प्रकार अपमान होता है जैसे हंसों के झुंड में बगुले की स्थिति होती है। 

6:- चाणक्य के अनुसार नदी के किनारे स्थित वृक्षों का जीवन अनिश्चित होता है, क्योंकि नदियाँ बाढ़ के समय अपने किनारे के पेड़ों को उजाड़ देती हैं। इसी प्रकार दूसरे के घरों में रहने वाली स्त्री भी किसी समय पतन के मार्ग पर जा सकती है। इसी तरह जिस राजा के पास अच्छी सलाह देने वाले मंत्री नहीं होते, वह भी बहुत समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसमें जरा भी संदेह नहीं करना चाहिए। 

7:- जिस तरह वेश्या धन के समाप्त होने पर पुरुष से मुँह मोड़ लेती है। उसी तरह जब राजा शक्तिहीन हो जाता है तो प्रजा उसका साथ छोड़ देती है। इसी प्रकार वृक्षों पर रहने वाले पक्षी भी तभी तक किसी वृक्ष पर बसेरा रखते हैं, जब तक वहाँ से उन्हें फल प्राप्त होते रहते हैं। अतिथि का जब पूरा स्वागत-सत्कार कर दिया जाता है तो वह भी उस घर को छोड़ देता है। 

8:- जिस प्रकार पत्नी के वियोग का दुख, अपने भाई-बंधुओं से प्राप्त अपमान का दुख असहनीय होता है, उसी प्रकार कर्ज से दबा व्यक्ति भी हर समय दुखी रहता है। दुष्ट राजा की सेवा में रहने वाला नौकर भी दुखी रहता है। 

9:- जिस व्यक्ति का पुत्र उसके नियंत्रण में रहता है, जिसकी पत्नी आज्ञा के अनुसार आचरण करती है और जो व्यक्ति अपने कमाए धन से पूरी तरह संतुष्ट रहता है। ऐसे मनुष्य के लिए यह संसार ही स्वर्ग के समान है।

10:- भोजन के लिए अच्छे पदार्थों का उपलब्ध होना, उन्हें पचाने की शक्ति का होना, सुंदर स्त्री के साथ संसर्ग के लिए कामशक्ति का होना, प्रचुर धन के साथ-साथ धन देने की इच्छा होना। ये सभी सुख मनुष्य को बहुत कठिनता से प्राप्त होते हैं। 




एक फकीर ने एक कुत्ते से पूछा कि तू है तो बहुत वफादार,, परन्तु तेरे में तीन कमियां हैं । 1-- तू पेशाब हमेशा दीवार पे ही करता है । 2-- तू फकीर को देखकर बिना बात के ही भौंकता है । 3-- तू रात को भौंक भौंक के लोगों की नींद खराब करता है । इस पर कुत्ते ने बहुत ही बढिया जवाब दिया,,, कुत्ता बोला ऐ बंदे सुन 1-- जमीन पर पेशाब इस लिए नहीं करता की कही किसी रब्ब के बंदे ने वहां बैठकर रब्ब को सज्जदा न किया हो । 2-- फकीर पर इस लिए भौंकता हूँ कि वोह भगवान को छोड कर लोगों से क्यों मांगता है,, जोकि खुद भीखारी हैं । भगवान से क्यों नहीं मांगता । 3-- और रात को इस लिए भौंकता हूँ कि हे पापी इंसान तू गफलत की नींद में क्यों सोया हुआ है। उठ अपने उस प्रभू को याद कर जिसने तुझे इतना सब कुछ दिया है ।



जंगल में नदी किनारे बहुत पुराना एक बरगद का पेड़ था । उस वृक्ष की हरी-भरी डालियों, हरे-हरे पत्तों को देखकर राहगीरों की आंखों को ठंडक पहुंचती थी।
थोड़ी दूर पर आम, जामुन, अमरुद और अनार के पेड़ भी थे। उस जंगल के सभी पेड़-पौधे बरगद दादा का बड़ा सम्मान करते थे ।
बरगद की छाया में थके हुए मुसाफिर अक्सर आराम करते थे। एक दिन एक राहगीर उस बरगद के नीचे आराम करने बैठा। सारा दिन धूप में पैदल चलने से वह थक गया था। हवा के झोंके उसके थके शरीर को आराम पहुंचा रहे थे।
उसे नींद आने लगी। वह सोने के लिए लेटा ही था कि अचानक उसकी निगाह बरगद की टहनियों पर पड़ी। वह राहगीर थोड़ा घमंडी था। जब उसने बरगद के छोटे-छोटे फलों को देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ। इतने बड़े पेड़ के इतने छोटे-छोटे से फूल और फल ?
राहगीर तिरस्कार से बोला। कुछ देर सोचने के बाद उसने हंसते हुए कहा, ‘‘सब कहते हैं कि यह पेड़ बहुत बुद्धिमान है अगर इसके फल इतने छोटे-छोटे हैं तो यह समझदार कैसे हो सकता है। ’’बरगद का पेड़ सारी बात सुनने के बाद भी चुप रहा।
उसने अपने पत्ते हिलाकर हवा की। राहगीर जल्द ही खर्राटे भरने लगा। तभी ‘टप’ से एक छोटा-सा फल राहगीर पर गिरा। वह एकदम झटके से उठा। ‘‘हूं जब मुझे नींद आ रही थी तभी यह होना था।’’ राहगीर फल उठाते हुए बड़बड़ाया ।
‘‘चोट लगी क्या ?’’ बरगद ने मुस्कुराते हुए पूछा ।‘‘नहीं पर तुमने मेरी नींद तोड़ दी।’’ राहगीर ने आंख मलते हुए कहा। ‘‘इसे घमंडी राहगीर के लिए एक सबक समझो।
तुम मुझ पर इसीलिए हंसे थे न कि मेरे फल छोटे हैं।’’ बरगद ने हंसते हुए कहा।
राहगीर गुस्से से कहा, ‘‘हां मैं हंसा था। न जाने लोग क्यों तुम्हें समझदार समझते हैं ? सोते लोगों को जगाना क्या समझदारी है?’’
बरगद फिर हंसा और बोला, ‘‘मेरे दोस्त, घमंड करना कोई बुद्धिमानी नहीं है। मेरे पत्ते तुम्हें आराम करने के लिए छाया व हवा दे रहे हैं। हां मेरे फल जरूर छोटे हैं ।
अगर मेरा फल नारियल जितना बड़ा होता और वह तुम्हारे सिर पर गिरा होता तो सोचो तुम्हारे सिर का क्या हाल होता।
’’राहगीर यह सुनकर चुप हो गया। उसने इस बारे में तो सोचा ही न था। ‘‘जो लोग बुद्धिमान होते हैं वे अपने आसपास की चीजों को देखकर भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।’’ बरगद ने धीरे से कहा।
राहगीर ने बरगद से माफी मांगते हुए कहा, ‘‘मुझे माफ कर दीजिए। मुझे सब समझ आ गया और आज मुझे सीख भी मिल गई।
मैं वायदा करता हूं कि आगे कभी भी घमंड नहीं करूंगा और छोटे-बड़े का भेदभाव मन में नहीं पालूंगा।’’


SANSKRIT

इसाइयों को इंग्लिश आती है तो वे ‪#‎बाइबल‬ पढ़ लेते है...
उसी प्रकार मुस्लिमों को उर्दू आती है तो वे ‪#‎कुरान‬ पढ़
लेते है...
सिखों को पंजाबी आती है तो वे ‪#‎गुरुग्रंथ‬ पढ़ लेते है...
हिन्दुओ को संस्कृत आती नही और वे न ‪#‎वेद‬ पढ़ पाते है न
‪#‎उपनिषद‬...
इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा किसी धर्म का ??
देश की परम्परागत संस्कृति के लिए यह एक बड़ी और
अफसोसनाक घटना है.
क्या इसकी एक वजह हिंदू समाज द्वारा संस्कृत भाषा के
प्रति बढ़ती वितृष्णा ही नहीं है?
इस देश में आज संस्कृत भाषा भाषियों की तादाद कुल बावन
हजार है.
लगभग एक सौ बीस करोड़ में कुल बावन हजार संस्कृत
भाषा भाषी !
आखिर हम अपनी किस महान संस्कृति पर गर्व करते हैं?
किस महानता पर मुग्ध होते हैं?
संस्कृत भाषा और साहित्य इस देश के हिंदू समाज
का महत्वपूर्ण अतीत है.
वेदों से लेकर रामायण, महाभारत के
अलावा पुराण तथा काव्य साहित्य संस्कृत में ही रहा है.
लेकिन विचित्र बात है कि समूचे देश में
वाराणसी जैसे एकाध स्थानों को छोड़ कर ‪#‎संस्कृत‬ भाषा में
लिखने-पढ़ने वाले लोग
बिरले ही मिलेंगे..



एक बार जंगल में एक बहुत बड़े से गड्ढे में एक शेर गिर गया ।
परेशान होकर शेर यहाँ वहां देखने लगा पर उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था ।
तभी वहां एक पेड़ में एक बन्दर आ गया , शेर को इस हाल में फंसा देखकर बन्दर , शेर का मजाक उडाने लगा , " क्यों शेर तू तो राजा बना फिरता है , अब तो तेरी अकल ठिकाने आ गयी न,
अब शिकारी तुझे मारेंगे , तेरी खाल निकालकर दीवार पर सजायेंगे, तेरे नाखून और दांत निकाल कर दवाई बनायेंगे ।
हँसमुखी चैनल पर तेरी न्यूज़ दिखाई जाएगी ?
तभी वो डाल जिसमें बन्दर बैठा था ,टूट गयी और बन्दर सीधे शेर के सामने आ गिरा ।
गिरते ही बोला " माँ कसम दादा माफ़ी मांगने के लिए कूदा हूँ !
हा हा हा !
वक़्त किसी का नहीं होता अगर आज आपका वक़्त है तो कल हमारा भी होगा है..

FRIENDSHIP

एक बार एक लडके को अपनी ही कॉलेज कि एक लडकी से प्यार हो गया..
लडके ने लडकी को दोस्त बनाया पर अपने प्यार का इजहार ना कर सका क्योँकी वो डरता था कि कहीँ लडकी ने मना कर दिया तो , दोस्ती भी टुट जाऐगी और वो उससे कभी बात तक नही करेगी.
इसी वजह से वो लडका परपोज करने से डरता था 
उनकी दोस्ती जितनी गहरी हो रही थी लडके का प्यार भी उतना ही गहरा होता गया
धीरे धीरे कॉलेज भी खत्‍म हो गया पर लडके ने अपने प्यार का इजहार नही किया , वो डर उसे प्यार का इजहार करने से रोक लेता था , 
कॉलेज पुरा हो गया था इसलिए वो बाहर ही मिलते थे
एक दिन लडके ने हिम्मत करके लडकी को कॉल किया और कहॉ कि मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है 
लडकी ने कहॉ कि मुझे भी तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है होटल में मिलते है लडका शाम को ये ठान कर गया कि आज मै अपने प्यार का इजहार करके ही रहुँगा चाहे कुछ भी हो, 
लडकी कहती है कि पहले तुम अपनी बात कहोगे या मै अपनी बात कहुँ 
लडका कहता है कि पहले तुम ही कहो 
लडकी कहती है कि अगले हप्ते मेरी शादी हो रही है और खासकर तुम्हे जरुर आना है
लडका ने ये सुनते ही जैसै दिल के अन्दर से आसमान की टुटने की आवाज आई 
फिर लडकी बोली कि अब तुम कहो लडके ने कहाँ कि मैनै देर कर दी शायद 
पहले मै अपनी बात करता 
इतना कह कर लडका चला जाता है और लडकी अपने घर चली जाती है
दुसरे दिन लडका लडकी को कॉल करके 
एक पार्क मै बुलाता है और कहता है कि 
मै पढाई के लिए अमेरिका जा रहा हूँ 
मै तुम्हारी शादी मै नही आ पाऊगाँ इतना कह कर लडका रोते हुऐ जाता है
तो लडकी बस इतना कहती है कि 
जिससे मै शादी करने जा रही हूँ उसका यहाँ होना भी तो जरुरी है 
लडका कहता कि पर वो तो यहॉ है ना 
लडकी कहती कि पागल मै तुमसे शादी कर रही हूँ तेरे दौस्त ने मुझे 1 महिने पहले सब कुछ बता दिया था। gasp emoticon 
हर एक फ्रैंड जरूरी होता हैं..


I like you
I love you..
दोनों में क्या अंतर है? 
इसका सबसे सुन्दर जवाब गौतम बुद्ध ने दिया है: अगर तुम 1 फूल को like करते हो तो तुम उसे तोड़कर रखना चाहोगे।
लेकिन अगर उस फूल से love करते हो तो तोड़ने के बजाय तुम रोज उसमे पानी डालोगे ताकि फूल मुरझाने न पाए।
जिसने भी इस रहस्य को समझ लिया समझो उसने पूरी जिंदगी को ही समझ लिया।



AAJ KA LOVE

आज कल शहरो में लड़के लड़की में प्यार होता है ,
खाक प्रेम होता है !
बस, ट्रैन, पार्टी कही भी मिल गए !!
पहले चरण में "you are looking sweet" फिर मोबाईल नंबर का आदान प्रदान हुआ ! और बात शुरु हो गयी !
दूसरी मुलाकात में " you are looking gorgeous" !
तीसरी मुलाकात तक अगर " you are looking hot" तक पहुच गए तो हो गया प्यार !
प्यार तो गाँव में हुआ करता था, साल भर तक चबूतरे पर बैठ कर आती है जाती है देखते रहते थे , प्यार का जिसको पता होना चाहिए उसे छोड कर पुरे मोहल्ले
को पता होता था !
समय दर्शन में ही बीत जाता था , प्रदर्शन का तो वक्त ही नहीं मिलता था ! कुछ समय बाद उसी लिफाफे में जिसमे लव लैटर देना था उसमे 101 रूपये डाल कर
उसकी शादी में दे आते थे !!!
छः साल बाद जब वही लड़की किसी रेडीमेट कपडे की दुकान पर मिल जाती है तो अपने बच्चे से कहती: मामा जी से नमस्ते करो !
अपन भी बच्चे का गाल खिंच कर कहते थे बहुत क्यूट है !!!!! 
तुम पर गया है !
जिसका खिंचना चाहिए उसका तो खिंच न पाए , बच्चे का ही गाल खीच लो !!!!


लडकिया लव के चककर मे पडकर अपने माँ-बाप को छोडकर
घर से भाग जाती है
मै उन लडकीयो के लिए कुछ कहना चाहुंगा
.
.
बाबुल की बगिया में जब तू , बनके
कली खिली,
तुमको क्या मालूम की,
उनको कितनी खुशी मिली ।
उस बाबुल को मार के ठोकर, घर से भाग जाती हो,
जिसका प्यारा हाथ पकड़ कर, तुम पहली बार
चली ॥
.
.
.
तूने निष्ठुर बन भाई की, राखी को कैसे
भुलाया,
घर से भागते वक़्त माँ का आँचल याद न आया ?
तेरे गम में बाप हलक से, कौर निगल ना पाया,
अपने स्वार्थ के खातिर, तूने घर में मातम फैलाया ॥
.
.
.
वो प्रेमी भी क्या प्रेमी,
जो तुम्हें भागने को उकसाये,
वो दोस्त भी क्या दोस्त, जो तेरे यौवन पे ललचाये ।
ऐसे तन के लोभी तुझको,
कभी भी सुख ना देंगे,
उलटे तुझसे ही तेरा, सुख चैन
सभी हर लेंगे ॥
.
.
.
सुख देने वालो को यदि, तुम दुःख दे जाओगी,
तो तुम भी अपने जीवन में, सुख
कहाँ से पाओगी?
अगर माँ बाप को अपने, तुम ठुकरा कर जाओगी,
तो जीवन के हर मोड पर, ठोकर
ही खाओगी ॥
.
.
.
जो - जो भी गई भागकर, ठोकर
खाती है,
अपनी गलती पर, रो-रोकर अश्क
बहाती है ।
एक ही किचन में, मुर्गी के संग साग
पकाती है,
हुईं भयानक भूल, सोचकर अब पछताती है ॥
.
.
.
जिंदगी में हर पल तू,
रहना सदा ही जिन्दा,
तेरे कारण माँ बाप को, ना होना पड़े शर्मिन्दा ।
यदि भाग गई घर से तो, वे जीते जी मर
जाएंगे,
तू उनकी बेटी है यह, सोच - सोच
पछताए


बीवियों के बारे मे महान व्यक्तियों के महान विचार ......

विवाह के बाद पति-पत्नी एक ही सिक्के के दो पहलू बन जाते हैं - एक-दूसरे का मुंह नहीं देख सकते, लेकिन हमेशा साथ रहते हैं... (सुकरात)
विवाह आपके लिए हर तरह से लाभकारी है - यदि अच्छी पत्नी मिली तो सुखी रहेंगे, बुरी मिली तो फिलॉस्फर बनेंगे... (सुकरात)
नारी हमें महान कार्य करने की प्रेरणा देती है, और उन्हें अंजाम देने से रोकती है... (ड्यूमॉस)
जीवन का सब से दुष्कर प्रश्न, जिसका मुझे उत्तर नहीं मिल पाया है - आखिर नारी चाहती क्या है...? (फ्रायड)
कुछ लोग मुझसे हमारे सफल दाम्पत्य जीवन का राज़ पूछते हैं... हम हर सप्ताह में दो बार रेस्तरां जाने का समय निकालते हैं - कैंडल-लाइट डिनर, कुछ संगीत, कुछ नाच... वह हर मंगलवार को जाती है, मैं हर शुक्रवार को... (हेनरी यंगमैन)
मैं आतंकवाद से नहीं डरता... मैं दो साल तक शादीशुदा रहा हूं... (सैम किनिसन)
बीवियों के बारे में मेरी किस्मत हमेशा ख़राब रही... पहली मुझे छोड़कर चली गई, और दूसरी नहीं गई... (पैट्रिक मरे)
यह सही है कि सब लोग आज़ाद और बराबर जन्म लेते हैं, पर कुछ लोग शादी कर लेते हैं... (नैश)
विवाह एक ऐसी विधि है, जिसके द्वारा आप यह मालूम करते हैं कि आपकी पत्नी को किस तरह का व्यक्ति दरकार था... (नैश)
विवाह को आनन्दमय रखने के दो राज़ - एक, जब आप गलत हों, गलती मान लें... दो, जब आप सही हों, चुप रहें... (नैश)
मेरी पत्नी को बस दो शिकायतें हैं - पहनने को कुछ नहीं है, और कपड़ों के लिए अलमारियां काफी नहीं हैं... (हेनरी यंगमैन)
मैं शादी से पहले क्या करता था - जो जी में आता था... (हेनरी यंगमैन)
हमारा वार्तालाप हुआ - मैंने कुछ शब्द कहे, और उसने कुछ पृष्ठ कहे... (हेनरी यंगमैन)
मेरी पत्नी और मैं 20 साल तक बहुत खुश रहे... फिर हमारी मुलाकात हो गई... (रॉडनी डेंजरफील्ड)
मैंने अपनी पत्नी से कई वर्ष से बात नहीं की... मैं उसे बीच में नहीं टोकना चाहता था... (रॉडनी डेंजरफील्ड)
एक अच्छी ‪#‎पत्नी‬ हमेशा अपनी ग़लती के लिए अपने पति को माफ कर देती है... (मिल्टन बर्ल)

एक विवाहित बेटी का पत्र उसकी माँ के नाम
"माँ तुम बहुत याद आती हो"
अब मेरी सुबह 6 बजे होती है
और रात 12 बज जाती है
, तब"माँ तुम बहुत याद आती हो"
सबको गरम गरम परोसती हूँ,
और खुद ठंढा ही खा लेती हूँ,
तब"माँ तुम बहुत याद आती हो"
जब कोई बीमार पड़ता है तो
एक पैर पर उसकी सेवा में लग जाती हूँ,
और जब मैं बीमार पड़ती हूँ
तो खुद ही अपनी सेवा कर लेती हूँ,
तब"माँ तुम बहुत याद आती हो..
"जब रात में सब सोते हैं
,बच्चों और पति को चादर ओढ़ाना नहीं भूलती,
और खुद को कोई चादर ओढाने वाला नहीं
, तब"माँ तुम बहुत याद आती हो"
सबकी जरुरत पूरी करते करते खुद को भूल जाती हूँ,
खुद से मिलने वाला कोई नहीं,
तब "माँ" तुम बहुत याद आती हो
"यही कहानी हर लड़की की शायद शादी के बाद हो जाती है
कहने को तो हर आदमी शादी से पहले कहता है"
माँ की याद तुम्हें आने न दूँगा
"पर, फिर भी क्यों?"
‪#‎माँ‬ तुम बहुत याद आती हो" ।


मुहावरो के आधुनिक अर्थ...

1 सुख की जान दुःख में डालना_ शादी करना
2 आ बेल मुझे मार- पत्नी को लड़ाई के लिए आमन्त्रित करना
3 दिवार से सर फोड़ना-पत्नी को कुछ समजाना
4 चार दिन की चांदनी वहीँ अँधेरी रात-पत्नी का मायके से घर आना
5 आत्म हत्या के लिए प्रेरित करना-शादी की राय देना
6 दुश्मनी निभाना-दोस्तों की शादी करवना
7 खुद का स्वार्थ देखना-शादी ना करना
8 पाप की सजा मिलना-शादी हो जाना
9 लव मैरिज करना-लड़ाई के लिए जोड़ीदार खुद ढूढ़ना
10 जिंदगी के मज़े लेना-कुँवारा रहना
11 ओखली में सर देना-शदि के लिए हा करना
12 दो पाठो में पीसना-दूसरी शदि करना
13 खुद को लूटते हुऐ देखना-पत्नी का पर्स से पैसे निकलना
14 पेरो तले जमीन खिसकना-पत्नी सामने दिखना
15 ‪#‎शादी‬ के फ़ोटो देखना-गलती पर पछताना
16 सर मुंडाते ही ओले पड़ना-परीक्षा में फेल होते ही शादी हो जाना
17 शादी के लिए हा करना-स्वेच्छा से जेल जाना
18 शादी -बिना अपराध की सजा
19 बेगाने शादी में अब्दुल्ला दीवाना-दुसरो के दुःख से खुश होना
20 साली आधी घर वाली-वो स्किम जो दूल्हे को बताई जाती है लेकिन दी नहीं जाती...
‪#‎गुस्ताखी_माफ‬ tongue emoticon wink emoticon 


                       रोचक इंटरव्यू: हर सवाल का जवाब M.P .

अफसर -: आपका नाम क्या है..? 
मोहन -: एम.पी.,
अफसर -: ठीक से पूरा बताओ 
मोहन -: मोहन पाल,
अफसर -: आपके पिता का नाम? 
मोहन : एम.पी.,
अफसर -: इसका क्या मतलब है? 
मोहन -: मनमोहन पाल
अफसर -: आप कहां रहते हैं? 
मोहन : एम.पी., सर।
अफसर -: अच्छा, मध्य प्रदेश? 
मोहन -: नहीं सर, महाराजपुर 
अफसर -: ओह,हो! तुम्हारी क्वालिफ़िकेशन क्या है?
मोहन -: एम.पी., सर।
अफसर -: अब यह क्या है?
मोहन -: मैट्रिक पास, सर। 
अफसर -: तुम्हे यह नौकरी क्यूं चाहिए?
मोहन -: एम.पी., सर।
अफसर -: (गुस्से से) अब इसका क्या मतलब है? 
मोहन -: मनी प्रॉब्लम , सर। 
अफसर -: अपनी विशेषता बताओ। 
मोहन -: एम.पी., सर।
अफसर -: अरे, साफ-साफ बताओ। 
मोहन -: मल्टिपरपज परस्नैलिटी। 
अफसर -: इंटरव्यू यहीं खत्म होता है, आप जा सकते हैं।
मोहन -: एम.पी., सर।...??
अफसर -: अब इसका क्या मतलब है...? 
मोहन -: मेरा परफ़ारमेंस...? 
अफसर -: (बाल नोचते हुए) एम.पी. !!!
मोहन -: यानि..?
अफसर -: MENTALLY PUNCTURE... gasp emoticon gasp emoticon 


15 लाख का सपना

कुछ दिन पहले सुना कि किसी ने कहा है मेरे खाते में भी 15 लाख आएंगे फिर मैं भी अमीर बन जाऊंगा
कल रात सोचते सोचते सो गया कि काश ये सच होता.....
रात को सपना आया मैंने देखा कि मेरे मोबाइल में SMS आया कि भारत सरकार ने 15 लाख मेरे "जान धन योजना वाले बैंक खाते में डिपाजिट कर दिए है मैं बड़ी ख़ुशी से उछलता हुआ कमरे से बाहर आया
सबको बोला "देखो देखो अच्छे दिन आ गए
मेरे र अकाउंट में 15 लाख आ गए"
घर वाले बोले ज्यादा खुश न हो
हमारे सबके खाते में भी 15 लाख आये है ये देखो...... कसम से बड़ा दुःख हुआ मुझे
फिर सोचा चलो दोस्तों को दिखाता हूँ
दोस्त बोले ज्यादा ना उछल हमारे खाते में भी 15 लाख हैं......सारी ख़ुशी फिर गायब
फिर सोचा चलो दूकान पर खूब सामान लेता हूँ
"भाई साहब ये रामू चाचा की दूकान क्यों बंद है" एक आदमी बोला भाई रामू चाचा ने तो दूकान बंद कर दी उन्हें अब दूकान की क्या जरूरत उनके खाते में तो 15 लाख आ गए
मे अब काम नही करना पड़ेगा.......
फिर सोचा चलो शॉपिंग माल में चलता हूँ
वहां देखा तो सब दुकान बंद थी उन लोगों को भी 15 लाख मिल गए थे.....
सोचा कोई बात नही होटल में खूब खाना खाता हूँ अपनी पसन्द का
अंदर देखा सब लोग जा चुके थे सिक्यूरिटी गार्ड भी नही था मतलब वो भी अमीर बन गया था उसके पास भी अब 15 लाख थे
बाजार गया तो सब रेहड़ी वाले चाय वाले
जूस वाले सब्जी वाले सब काम छोड़कर बैंक में जा चुके थे रूपये लेने क्योंकि अब किसी को काम करने की कोई जरूरत नही थी सबके पास "15 लाख" रूपये थे
शहर से बाहर गया तो सब फैक्ट्री बंद सब मजदूरों को 15 लाख मिल चुके थे सब नाच गा रहे थे......
"अच्छे दिन आ गए... अच्छे दिन आ गए"
शाम को खेतो की तरफ गया तो खेत में कोई नही था सब किसान खेती छोड़ कर घर जा चुके थे अब उनको धुप बारिश में काम करने की कोई जरूरत नही थी वो भी अमीर बन चुके थे
हास्पिटल देखा वहां डॉक्टर ताश खेल रहे थे पूछने पर बोले हमे कोई इलाज़ नही करना अब 15 लाख काफी जीवन भर के लिए....
फिर 5 दिन बाद पता चला अचानक लोग भूख से मरने लगे है क्योंकि खेत में सब्जी नही उग रही सब राशन की दुकान बंद है होटल ढ़ाबे भी बंद पड़े हैं
लोग बीमारी से मरने लगे हैं क्योंकि डॉक्टर भी नही हैं पशु भी भूख से मर रहे है खेत से चारा नही मिल रहा बच्चे भी भूख श से रो रहे है क्योंकि पशु दूध नही दे रहे लोग सड़को पर भागे फिर रहे है 1-1 लाख रूपये हाथ में लिए
"ये लो भाई 50 हज़ार रूपये 100 ग्राम दूध दे दो दिन से बच्चा भूख से मर रहा है
फिर 10 दिन बाद लोग मरने लगे कुछ जिन्दा लोग सड़कों पर रुपयों का बेग लिए घूम रहे है भाई ये लो ये लो 5 लाख रूपये हमे बस 5 किलो गेहूं देदो 10 दिन से भूखे हैं सब बाजार बंद हो चुके है अनाज नही है किसी के पास.....
सब तरफ मुर्दा लोग दिख रहे है
और मैं भी अपने "15 लाख" रूपये लिए भागा जा रहा हूँ.... लेलो भाई लेलो ये "15 लाख" बस रोटी का एक टुकड़ा देदो......
इतने में माँ की आवाज़ आई
"उठ जा कमीने कब से चारपाई को लात मार रहा है मर गया मर गया.... की आवाज़ लगा रहा है कोई बुरा सपना देखा क्या ?
नही माँ बुरा नही "अच्छे दिनो" का सपना देखा
उनसे अच्छे तो ये "बुरे दिन" हैं गरीब सही मगर घर में अनाज तो है पानी है बच्चे खेल रहे हैं पशु खेत में चर रहे हैं दुकानों पर भीड़ है
लोग आ जा रहे हैं......
चल पड़ा मैं भी अपने काम पर ये सोचते हुए
काश ! 
ये "15 लाख" कभी भी किसी के खाते में न आये तो अच्छा है वरना फिर काम कौन करेगा जब सबके पास "15 लाख" होंगे..



एक आश्रम के बाहर बड़ा सा पत्थर पड़ा था।कई लोग उससे टकराए ,किसी की गाड़ी का टायर कट गया तो किसी की साइकिल पलट गयी।सब उस पत्थर को व उस पत्थर को रखने वाले को कोसते और गलियां देते व आगे निकल जाते।एक सब्जी बेचने वाला भी वहां से गुजरा उसके सिर पर सब्जियों से भरा टोकरा था जैसे ही वह पत्थर से टकराया उसकी सारी सब्जियां सड़क पर बिखर गयी।पहले उसने सब्जियां अपने टोकरे में भरी और फिर उस पत्थर को उठाने की कोशिश करने लगा।पत्थर हटाते समय वह केवल यहीं सोच रहा था कि कहीं मेरी तरह किसी और को भी चोट ना लग जाए।आखिर अपने अथक प्रयास से वह उस पत्थर को हटाने में सफल हो गया तो उसने एक कागज देखा जिस पर लिखा था धन्यवाद तुमने बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करने के इरादे से इस भारी पत्थर को हटाया है।इसलिए यह ईनाम स्वीकार करो।उसने जैसे ही कागज को खोला उसमें से एक हजार का नोट मिला।
हम अपने जीवन में दिखावा तो बहुत करते है लेकिन सही मायने में ऐसा कोई काम नहीं कर पाते जिसके लिए लोग हमें दिल से धन्यवाद कह सके,हमारी प्रशंसा कर सके।हम अच्छे कपडे पहनते है ,अच्छा घर बनाते है ,बड़ी सी गाड़ी रखते है ताकि लोग हमें सराहे।माना कि सजा हुआ घर सजे हुए लोग ,चमचमाती कार सबको बहुत अच्छी लगती है और सब उसकी तारीफ़ भी करते है।लेकिन क्या सही मायने वे हमारी प्रशंसा कर पाते है।जिसके पास ये सारी चीजे है लोग उनसे ईर्ष्या तो कर सकते है उनसे प्यार नहीं करते और प्रशंसा भी मुहं देखी करते है।भले ही हमने यह सब कुछ बहुत मेहनत व ईमानदारी से पाया हो।
जब तक हम निस्वार्थ भाव से लोगों के काम नहीं आयेगें तब तक हम सच्ची प्रशंसा व लोगों का प्यार पाने काबिल नहीं हो सकते।


प्राचीन जापान में एक सम्राट बहुत सनकी था। वह छोटी-छोटी गलतियों के लिए बड़ा दंड दे देता था। इसलिए प्रजा उससे बहुत भयभीत रहती थी। सम्राट के पास बीस फूलदानियों का एक अति सुंदर संग्रह था, जिस पर उसे बड़ा गर्व था। वह अपने महल में आने वाले अतिथियों को यह संग्रह अवश्य दिखाता था।
एक दिन फूलदानियों की नियमित सफाई के दौरान सेवक से एक फूलदानी टूट गई। सम्राट तो आगबबूला हो गया। उसने सेवक को फांसी पर लटकाने का हुक्म दे दिया। राज्य में खलबली मच गई। एक फूलदानी टूटने की इतनी बड़ी सजा पर सभी हैरान रह गए। सम्राट से रहम की अपील की गई, किंतु वह नहीं माना।
तब एक बूढ़ा आदमी दरबार में हाजिर होकर बोला, ‘सरकार! मैं टूटी हुई फूलदानी जोडऩे में सिद्धहस्त हूं। मैं उसे इस तरह जोड़ दूंगा कि वह पहले जैसी दिखाई देगी।’ सम्राट ने प्रसन्न होकर बूढ़े को अपनी शेष फूलदानियां दिखाते हुए कहा, ‘इन उन्नीस फूलदालियों की तरह यदि तुम टूटी हुई फूलदानी को भी बना दोगे तो मुंहमांगा इनाम पाओगे।’
सम्राट की बात समाप्त होते ही बूढ़े ने अपनी लाठी उठाई और सभी फूलदानियां तोड़ दीं। यह देखकर सम्राट क्रोधावेश में कांपते हुए बोला, ‘बेवकूफ! ये तुमने क्या किया?’ बूढ़े ने दृढ़ता के साथ कहा, ‘महाराज! इनमें से हर फूलदानी के पीछे एक आदमी की जान जाने वाली थी। तो मैंने अपने इंसान होने का फर्ज निभाते हुए उन्नीस लोगों के प्राण बचा लिए। अब आप शौक से मुझे फांसी की सजा दे सकते हैं।’
बूढ़े की चतुराई और साहस देखकर सम्राट को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने बूढ़े तथा सेवक दोनों को माफ कर दिया। बुराई से लडऩे के लिए साहस और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। यदि निर्भीकता से डटकर खड़े रहें तो बुराई का अंत अवश्य होता है..

Thursday, 6 August 2015


बोझ

ऑपरेशन थियेटर के बाहर खड़े रोहित का दिल जोर जोर से धड़क रहा था .जया के अचानक ही डिलीवरी डेट से दो हफ्ते पहले लेबर पेन उठ जाने के कारण रोहित आनन् फानन में उसे पास के एक नर्सिंग होम में ले आया था .सघन चिकित्सा कक्ष से निकली एक नर्स ने आकर रोहित को तसल्ली देते हुए कहा -''..... आपकी वाइफ और बेबी ठीक है .मुबारक हो आपके घर लक्ष्मी आई है !'' बेटी हुई है सुनकर रोहित थोडा बुझ सा गया .तभी काफी देर से वहीँ उपस्थित एक बुजुर्ग उसके पास आकर बोले -''क्या बेटी के होने से हताश हो ?''
रोहित ने झिझकते हुए कहा -''...नहीं ....नहीं तो '' बुजुर्ग बोले -'' बेटा ऐसा कभी मत करना वरना ये बोझ बनकर जिंदगी भर अपने दिल पर ढ़ोना होगा .मैं भी अपनी बेटी के होने पर ऐसे ही दुखी हो गया था .मेरी पत्नी से मेरा इसी झुंझलाहट में इतना झगडा हुआ कि वो कई महीनों को मायके चली गयी थी .घर वालों के समझाने पर मैं उसे वापस ले आया .समय बीतता गया और मेरी वही बिटिया आज इतनी काबिल है कि लोग पूछते हैं ..''आप डॉ नीरजा के पिता जी हैं !''...तब मेरा सिर गर्व से ऊँचा उठ जाता है पर....
फिर अपनी ‪#‎बिटिया‬ के जन्म पर अपने किये व्यवहार को सोचकर दिल पर एक बोझ सा महसूस करता हूँ .बेटा तुम ऐसा कभी मत होने देना .
''रोहित ने उन बुजुर्ग के झुककर चरण स्पर्श करते हुए कहा -''.....आप डॉ नीरजा के पिता जी हैं !!!....
मतलब जिन्होंने अभी अभी मेरी ‪#‎पत्नी‬ और बच्ची की ऑपरेशन कर जान बचाई है .
आपका बहुत बहुत शुक्रिया आपने न केवल मेरी सोच को बदला है बल्कि मुझे मेरी बिटिया के सामने भविष्य में शर्मिंदा होने से भी बचा लिया है .'


AJ KI SHOCH

एक लड़का एक लड़की को छेड़ रहा था ,
लड़की ने उसे कहा-क्या प्रॉब्लम है, बुलाऊ पुलिस
को.......
लड़के ने कहा-पुलिस को बुलाएगी ....बुला पुलिस को,
तेरी जेसी बहोत देखी है मैंने....... और उसने उस पर बन्दुक
तान दी...........वोलड़की­ रोने लग गयी। ।
पास में बहुत सारी भीड़ इकठ्ठी हो गयी, सब तमाशा
देख रहे थे,
इतने में जो लड़के ने कहा उसे सुनकर सब ताज्जुब में पड़ गए,
शर्म के मारे किसी का सर नही उठा,
लड़के ने कहा -बचाने नही आओगे इसे .....क्या इतनी
भीड़ में किसी की हिम्मत नही ,की इस लड़की को
बचा सके , कल जब इंडिया गेट पर इसकी लाश पड़ी
होगी ,तब जनाजे में बहोत भीड़ होगी .........इसकी
जगह आपकी कोई बहन होती ,तो क्या आप ऐसे ही खड़े
तमाशा देखते ,क्या इस लड़की की मौत पर सिर्फ न्यूज़
पेपर पर हेड लाइन ही काफी है क्या ........?
क्या यही है हमारा देश ,यही है हमारे देश के युवा
.........मर जाना चाहिए तुमको .......की तुम अपनी
बहन बेटियो के हिफाजत नही कर सकते ।
सबको अपने फेसबुक प्रोफाइल पर तिरंगे या देशभक्ति
की पिक्चर लगाने का शौक है। लेकिन कोई उसकी
मर्यादा का ध्यान नही देता , ये लड़की मर रही है तुम
लोग तमाशा देख रहे हो ,
फिर उस लड़के ने कहा - इस लड़की जेसी मेरी बहन थी
,मार डाला .......दरिंदो ने, तुम लोगो की हैवानियत
ने.........सब ऐसे ही तमाशा देखते रह गए , किसी ने
उसकी मदद नही की......
अब यही होगा तुम लोगो के साथ ......फिर देखना
तमाशा......
फिर उस लड़के ने उस लड़की से माफ़ी मागते हुए कहा-
बहन माफ़ करना ,मेरा आपका दिल दुखाने का इरादा
नही था .......शायद मेरे इस प्रयास से इन लोगो की
अंतरात्मा जाग जाए ।
उस लड़की ने वापस कहा-भैया आपको मेरा सलाम ,
काश सब ऐसे होते तो आपकी बहन आज जिन्दा होती
,आज से आप मेरे भाई हो...

Sunday, 26 July 2015

आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु हैं


एक दिन उन्होंने पारस पत्थर की कहानी अपने सभी शिष्यों को सुनाई | इस पत्थर के बारे में जानने के लिए सबसे अधिक जिज्ञासु वही शिष्य था | यह देख गुरु उसकी मंशा समझ गये | वे समझ गये कि यह आलसी हैं इसलिए उसे इस जादुई पत्थर की लालसा हैं | लेकिन ये मुर्ख यह नहीं जानता कि जो व्यक्ति कर्महीन होता हैं | उसकी सहायता तो स्वयं भगवान् भी नहीं कर सकते और ये तो बस एक साधारण पत्थर हैं | यह सोचते- सोचते गुरु ने सोचा कि यही सही वक्त हैं इस शिष्य को आलसी के अवगुणों से अवगत कराने का | ऐसा सोच गुरु जी ने उस शिष्य को अपनी कुटिया में बुलवाया |

कुछ क्षण बाद, कुटिया के भीतर शिष्य ने प्रवेश किया और गुरु को सिर झुकाकर प्रणाम किया | गुरु ने आशीर्वाद देते हुए कहा – बेटा ! मैंने आज जिस पारस पत्थर की कहानी सुनाई वो पत्थर मेरे पास हैं और तुम मेरे प्रिय शिष्य हो इसलिए मैं वो पत्थर सूर्य उदय से लेकर सूर्यास्त तक के लिए तुम्हे देना चाहता हूँ | तुम उससे जो करना चाहों कर सकते हो | तुम्हे जीतना स्वर्ण चाहिये तुम इस पत्थर से इस दिए गये समय में बना सकते हो | यह सुनकर शिष्य की ख़ुशी का ठिकाना न था | गुरु जी ने उसे प्रातः सूर्योदय होने पर पत्थर देने का कहा |रात भर वह इस पत्थर के बारे में सोचता रहा |

दुसरे दिन, शिष्य ने गुरु जी से पत्थर लिया और सोचने लगा कि कितना स्वर्ण मेरे जीवन के लिए काफी होगा ? और इसी चिंतन में उसने आधा दिन निकाल दिया | भोजन कर वो अपने कक्ष में आया | उस वक्त भी वह उसी चिंतन में था कि कितना स्वर्ण जीवनव्यापन के लिए पर्याप्त होगा और यह सोचते-सोचते आदतानुसार भोजन के बाद उसकी आँख लग गई और जब खुली तब दिन ढलने को था और गुरूजी के वापस आने का समय हो चूका था | उसे फिर कुछ समझ नहीं आया | इतने में गुरु जी वापस आ गये और उन्होंने पत्थर वापस ले लिया | शिष्य ने बहुत विनती की लेकिन गुरु जी ने एक ना सुनी | तब गुरु जी ने शिष्य को समझाया पुत्र ! आलस्य व्यक्ति की समझ पर लगा ताला हैं | आलसी के कारण तुम इतने महान अवसर का लाभ भी ना उठ सके जो व्यक्ति कर्म से भागता हैं उसकी किस्मत कभी उसका साथ नहीं देती | तुम एक अच्छे शिष्य हो परन्तु तुममे बहुत आलस हैं | जिस दिन तुम इस आलस के चौले को निकाल फेकोगे | उस दिन तुम्हारे पास कई पारस के पत्थर होंगे | शिष्य को गुरु की बात समझ आगई और उसने खुद को पूरी तरह बदल दिया | उसे कभी किसी पारस की लालसा नहीं रही |

“आलस्य  मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु हैं” Laziness is the biggest enemy for human  आलस मनुष्य को ख़त्म कर देता हैं | इस कहानी से आपको क्या शिक्षा मिली ?Reply this id:- d.ksharma500@gmail.com

रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले लड़के की नजरें अचानक एक बुजुर्ग दंपति पर पड़ी। उसने देखा कि वो बुजुर्ग पति अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उसे सहारा देते हुए चल रहा था । . थोड़ी दूर जाकर वो दंपति एक खाली जगह देखकर बैठ गए । कपड़ो के पहनावे से वो गरीब ही लग रहे थे । . तभी ट्रेन के आने के संकेत हुए और वो चाय वाला अपने काम में लग गया। शाम में जब वो चाय वाला वापिस स्टेशन पर आया तो देखाकि वो बुजुर्ग दंपति अभी भी उसी जगह बैठे हुए है । . वो उन्हें देखकर कुछ सोच में पड़ गया । देर रात तक जब चाय वाले ने उन बुजुर्ग दंपति को उसी जगह पर देखा तो वो उनके पास गया और उनसे पूछने लगा: बाबा आप सुबह से यहाँ क्या कर रहे है ? आपको जाना कहाँ है ? . बुजुर्ग पति ने अपना जेब से कागज का एक टुकड़ा निकालकर चाय वाले को दिया और कहा: बेटा हम दोनों में से किसी को पढ़ना नहीं आता,इस कागज में मेरे बड़े बेटे का पता लिखा हुआ है ।मेरे छोटे बेटे ने कहा था कि अगर भैया आपको लेने ना आ पाये तो किसी को भी ये पता बता देना, आपको सही जगह पहुँचा देगा । . चाय वाले ने उत्सुकतावश जब वो कागज खोला तो उसके होश उड़ गये । उसकी आँखों से एकाएक आंसूओं की धारा बहने लगी । . उस कागज में लिखा था कि......... "कृपया इन दोनों को आपके शहर के किसी वृध्दाश्रम में भर्ती करा दीजिए, बहुत बहुत मेहरबानी होगी..." दोस्तों ! धिक्कार है ऐसी संतान पर, इसके बजाय तो बाँझ रह जाना अच्छा होता है !


परिश्रम का फल मीठा होता है

बंदरों का सरदार अपने बच्चे के साथ किसी बड़े से पेड़ की डाली पर बैठा हुआ था . 
बच्चा बोला , ” मुझे भूख लगी है , क्या आप मुझे खाने के लिए कुछ पत्तियां दे सकते हैं ?” 
बन्दर मुस्कुराया , ” मैं दे तो सकता हूँ , पर अच्छा होगा तुम खुद ही अपने लिए पत्तियां तोड़ लो. “ 
” लेकिन मुझे अच्छी पत्तियों की पहचान नहीं है .”, 
बच्चा उदास होते हुए बोला . “तुम्हारे पास एक विकल्प है , ”
बन्दर बोला , ” इस पेड़ को देखो , तुम चाहो तो नीचे की डालियों से पुरानी–कड़ी पत्तियां चुन सकते हो या ऊपर की पतली डालियों पर उगी ताज़ी -नरम पत्तियां तोड़ कर खा सकते हो .” बच्चा बोला , ”
ये ठीक नहीं है , भला ये अच्छी – अच्छी पत्तियां नीचे क्यों नहीं उग सकतीं , 
ताकि सभी लोग आसानी से उन्हें खा सकें .?”
“यही तो बात है , अगर वे सबके पहुँच में होतीं तो उनकी उपलब्धता कहाँ हो पाती … उनके बढ़ने से पहले ही उन्हें तोड़ कर खा लिया जाता !”, 
” बन्दर ने समझाया . 
”लेकिन इन पतली डालियों पर चढ़ना खतरनाक हो सकता है , 
डाल टूट सकती है , 
मेरा पाँव फिसल सकता है ,
मैं नीचे गिर कर चोटिल हो सकता हूँ …”बच्चे ने अपनी चिंता जताई 
बन्दर बोला , “सुनो बेटा , एक बात हमेशा याद रखो , हम अपने दिमाग में खतरे की जो तस्वीर बनाते हैं अक्सर खतरा उससे कहीं कम होता है .“ 
“पर ऐसा है तो हर एक बन्दर उन डालियों से ताज़ी पत्तियां तोड़कर क्यों नहीं खाता ?” 
बच्चे ने पुछा . बन्दर कुछ सोच कर बोला ” 
क्योंकि , ज्यादातर बंदरों को डर कर जीने की आदत पड़ चुकी होती है , वे सड़ी -गली पत्तियां खाकर उसकी शिकायत करना पसंद करते हैं पर कभी खतरा उठा कर वो पाने की कोशिश नहीं करते जो वो सचमुच पाना चाहते हैं …. पर तुम ऐसा मत करना ,
ये जंगल तमाम सम्भावनाओं से भरा हुआ है , 
अपने डर को जीतो और जाओ ऐसी ज़िन्दगी जियो जो तुम सचमुच जीना चाहते हो !”
बच्चा समझ चुका था कि उसे क्या करना है , उसने तुरंत ही अपने डर को पीछे छोड़ा और ताज़ी- नरम पत्तियों से अपनी भूख मिटाई।

Prayashchit


बासमती चावल बेचने वाले एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा। सेठ को हुआ कि इतना पाप हो रहा है तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए।
एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और किसी साधु बाबा को आमंत्रित कर भोजन प्रसाद लेने के लिए प्रार्थना की।
साधु बाबा ने बासमती चावल की खीर खायी। दोपहर का समय था। 
सेठ ने कहाः
"महाराज ! 
अभी आराम कीजिए। 
थोड़ी धूप कम हो जाय फिर पधारियेगा।"
साधु बाबा ने बात स्वीकार कर ली। 
सेठ ने 100-100 रूपये वाली 10 लाख जितनी रकम की गड्डियाँ उसी कमरे में चादर से ढँककर रख दी।
साधु बाबा आराम करने लगे। 
खीर थोड़ी हजम हुई। 
चोरी के चावल थे। 
साधु बाबा के मन में हुआ कि इतनी सारी गड्डियाँ पड़ी हैं, एक-दो उठाकर झोले में रख लूँ तो किसको पता चलेगा ? साधु बाबा ने एक गड्डी उठाकर रख ली। 
शाम हुई तो सेठ को आशीर्वाद देकर चल पड़े।
सेठ दूसरे दिन रूपये गिनने बैठा तो 1 गड्डी (दस हजार रुपये) कम निकली। सेठ ने सोचा कि महात्मा तो भगवत्पुरुष थे, वे क्यों लेंगे ? 
नौकरों की धुलाई-पिटाई चालू हो गयी। ऐसा करते-करते दोपहर हो गयी।
इतने में साधु बाबा आ पहुँचे तथा अपने झोले में से गड्डी निकाल कर सेठ को देते हुए बोलेः
"नौकरों को मत पीटना, गड्डी मैं ले गया था।"
सेठ ने कहाः "महाराज ! आप क्यों लेंगे? 
जब यहाँ नौकरों से पूछताछ शुरु हुई तब कोई भय के मारे आपको दे गया होगा और आप नौकर को बचाने के उद्देश्य से ही वापस करने आये हैं क्योंकि साधु तो दयालु होते हैं।"
साधुः "यह ‪#‎दयालुता‬ नहीं है। मैं सचमुच में तुम्हारी गड्डी चुराकर ले गया था। 
सेठ ! तुम सच बताओ कि तुम कल खीर किसकी और किसलिए बनायी थी ?"
सेठ ने सारी बात बता दी कि स्टेशन मास्टर से चोरी के चावल खरीदता हूँ, उसी चावल की खीर थी।
साधु बाबाः "चोरी के चावल की खीर थी इसलिए उसने मेरे मन में भी चोरी का भाव उत्पन्न कर दिया।
सुबह जब पेट खाली हुआ, तेरी खीर का सफाया हो गया तब मेरी बुद्धि शुद्ध हुई कि
'हे राम.... यह क्या हो गया ? मेरे कारण बेचारे नौकरों पर न जाने क्या बीत रही होगी। 
इसलिए तेरे पैसे लौटाने आ गया।"
इसीलिए कहते हैं किः
"जैसा खाओ अन्न वैसा होवे मन। 
जैसा पीओ पानी वैसी होवे वाणी।"

Friday, 24 July 2015

सत्य वचन


अगर जींदगी मे कुछ पाना हो तो,,,तरीके बदलो....., ईरादे नही.. 

जब सड़क पर बारात नाचरही हो तो हॉर्न मार-मार के परेशान ना हो......गाडी से उतरकर थोड़ा नाच लें...,मन शान्त होगा। टाइम तो उतना लगना ही है..! 


इस कलयुग मेंरूपया चाहे कितना भी गिर जाए, इतना कभी नहीं गिर पायेगा,जितना रूपये के लिए इंसान गिर चूका है...


सत्य वचन.... रास्ते में अगर मंदिर देखो तो,,,प्रार्थना नहीं करो तो चलेगा ..पर रास्ते में एम्बुलेंस मिले तब प्रार्थना जरूर करना,,,शायद कोई जिन्दगी बच जाये.


जिसके पास उम्मीद हैं,वो लाख बार हार के भी,नही हार सकता..! 


बादाम खाने सेउतनी अक्ल नहीं आती...जितनीधोखा खाने से आती है.....! 


एक बहुत अच्छी बातजो जिन्दगी भर याद रखिये,,,आप का खुश रहना ही आप का बुरा चाहने वालों के लिएसबसे बड़ी सजा है....! 


खुबसूरत लोग हमेशा अच्छे नहीं होते,अच्छे लोग हमेशा खूबसूरत नहीं होते...!


KUCHH SIKH

एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये | वहाँ एक महिला बैठी मिली | उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी |
कालिदास ने उस महिला से पूछा : ” क्या बेच रही हो ? “
महिला ने जवाब दिया : ” महाराज ! मैं पाप बेचती हूँ | “
कालिदास ने आश्चर्यचकित होकर पूछा : ” पाप और मटके में ? “
महिला बोली : ” हाँ , महाराज ! मटके में पाप है| “
कालिदास : ” कौन-सा पाप है ? “
महिला : ” आठ पाप इस मटके में है | मैं चिल्लाकर कहती हूँ की मैं पाप बेचती हूँ पाप … और लोग पैसे देकर पाप ले जाते है|”
अब महाकवि कालिदास को और आश्चर्य हुआ : ” पैसे देकर लोग पाप ले जाते है ?“
महिला : ” हाँ , महाराज ! पैसे से खरीदकर लोग पाप ले जाते है | “
कालिदास : ” इस मटके में आठ पाप कौन-कौन से है ? “
महिला : ” क्रोध ,बुद्धिनाश , यश का नाश , स्त्री एवं बच्चों के साथ अत्याचार और अन्याय , चोरी , असत्य आदि दुराचार , पुण्य का नाश , और स्वास्थ्य का नाश … ऐसे आठ प्रकार के पाप इस घड़े में है | “
कालिदास को कौतुहल हुआ की यह तो बड़ी विचित्र बात है | किसी भी शास्त्र में नहीं आया है की मटके में आठ प्रकार के पाप होते है |
वे बोले : ” आखिरकार इसमें क्या है ? ”
महिला : ” महाराज ! इसमें शराब है शराब ! “
कालिदास महिला की कुशलता पर प्रसन्न होकर बोले : ” तुझे धन्यवाद है ! शराब में आठ प्रकार के पाप है यह तू जानती है और ‘मैं पाप बेचती हूँ ‘ ऐसा कहकर बेचती है फिर भी लोग ले जाते है |

 @@@@@@@@@                                         @@@@@@@@@      


ज़रूर पढ़ें, बड़ी ही गहरी बात लिख दी है किसी शक्शियत नें ... 
बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में , उसी देहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है। 
सजाया गया था चमचमाते झालर से मस्जिद और चमकते चादर से दरगाह को, बाहर एक फ़कीर को भूख और ठंड से तड़प के मरते देखा है ।। 
लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार , पर बहार एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है। 
वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हाल के लिए , घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई बदलते देखा है। 
सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को, आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है। 
जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन , आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है ।
जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी , आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा है ।
दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था जिस बेटी को जबरन बाप ने, आज पीटते उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है । 
मारा गया वो पंडित बेमौत सड़क दुर्घटना में यारो , जिसे खुदको काल सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है। 
जिस घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों , आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है। 
बंद कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर, अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा। 
आत्महत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर, अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता !
गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है उन्होंने देख लिया कि, इंसान हमसे अच्छा नोंचता है। 
कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर, क्या मस्त तलवे चाटते हुए इंसान देखा है । माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती... यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!! 



Thursday, 16 July 2015


एक राजा को फूलों का शौक था। उसने सुंदर, सुगंधित फूलों के पचीस गमले अपने शयनखंड के प्रांगण में रखवा रखे थे। उनकी देखभाल के लिए एक नौकर रखा गया था। एक दिन नौकर से एक गमला टूट गया।

राजा को पता चला तो वह आगबबूला हो गया। उसने आदेश दिया कि नौकर को फांसी दे दी जाए। मंत्री ने राजा को बहुत समझाया, लेकिन राजा ने एक न मानी। फिर राजा ने नगर में घोषणा करवा दी कि जो कोई टूटे हुए गमले की मरम्मत करके उसे ज्यों का त्यों बना देगा, उसे मुंहमांगा पुरस्कार दिया जाएगा। कई लोग अपना भाग्य आजमाने के लिए आए लेकिन असफल रहे।

एक दिन एक महात्मा नगर में पधारे। उनके कान तक भी गमले वाली बात पहुंची। वह राजदरबार में गए और बोले- "राजन् तेरे टूटे गमले को जोड़ने की जिम्मेदारी मैं लेता हूं। लेकिन मैं तुम्हें समझाना चाहता हूं कि यह देह अमर नहीं तो मिट्टी के गमले कैसे अमर रह सकते हैं। ये तो फूटेंगे, गलेंगे, मिटेंगे। पौधा भी सूखेगा।" लेकिन राजा अपनी बात पर अडिग रहा।
आखिर ‪#‎राजा‬ उन्हें वहां ले गया जहां गमले रखे हुए थे। महात्मा ने एक डंडा उठाया और एक-एक करके प्रहार करते हुए सभी गमले तोड़ दिए। थोड़ी देर तक तो राजा चकित होकर देखता रहा। उसे लगा यह गमले जोड़ने का कोई नया विज्ञान होगा। लेकिन ‪#‎महात्मा‬ को उसी तरह खड़ा देख उसने आश्चर्य से पूछा- "ये आपने क्या किया?"

महात्मा बोले- "मैंने चौबीस आदमियों की जान बचाई है। एक गमला टूटने से एक को फांसी लग रही है। चौबीस गमले भी किसी न किसी के हाथ से ऐसे ही टूटेंगे तो उन चौबीसों को भी फांसी लगेगी। सो मैंने गमले तोड़कर उन लोगों की जान बचाई है।"
राजा महात्मा की बात समझ गया और उसे अपने किये पर बहुत अफसोस हुआ। उसने हाथ जोड़कर उनसे क्षमा मांगी और नौकर की फांसी का हुक्म वापस ले लिया।

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- शुभ दिन दोस्तों -

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Wednesday, 15 July 2015

गुरु के दर्शन

                                                                 *गुरु के दर्शन*
एक बार गुरु नानक देव जी से किसी ने पूछा कि गुरु के दर्शन करने से क्या लाभ होता है ?
गुरु जी ने कहा कि इस रास्ते पर चला जा, जो भी सब से पहले मिले उस से पूछ लेना |
वह व्यक्ति उस रास्ते पर गया तो उसे सब से पहले एक कौवा मिला, उसने कौवे से पूछा कि गुरु के दर्शन करने से क्या होता है ?
उसके यह पूछते ही वह कौवा मर गया....

वह व्यक्ति वापिस गुरु जी के पास आया और सब हाल बताया...

अब गुरु ने कहा कि फलाने घर में एक गाय ने एक बछड़ा दिया है, उससे जाकर यह सवाल पूछो, वह आदमी वहां पहुंचा और बछड़े के आगे यही सवाल किया तो वह भी मर गया.....
वह आदमी भागा भागा गुरु जी के पास आया और सब बताया...
अब गुरु जी ने कहा कि फलाने घर में जा, वहां एक बच्चा पैदा हुआ है, उस से यही सवाल करना...
वह आदमी बोला के वह बच्चा भी मर गया तो ?
गुरु जी ने कहा कि तेरे सवाल का जवाब वही देगा...
अब वह आदमी उस घर में गया और जब बच्चे के पास कोई ना था तो उसने पूछा कि गुरु के दर्शन करने से क्या लाभ होता है ?
वह बच्चा बोला कि मैंने खुद तो नहीं किये लेकिन तू जब पहली बार गुरु जी के दर्शन करके मेरे पास आया तो मुझे कौवे की योनी से मुक्ति मिली और बछड़े का जन्म मिला....
तू दूसरी बार गुरु के दर्शन करके मेरे पास आया तो मुझे बछड़े से इंसान का जन्म मिला....
सो इतना बड़ा हो सकता है गुरु के दर्शन करने का फल, फिर चाहे वो दर्शन आंतरिक हो या बाहरी......





ऐ सतगुरू मेरे...

नज़रों को कुछ ऐसी खुदाई दे...
जिधर देखूँ उधर तू ही दिखाई दे...
कर दे ऐसी कृपा आज इस दास पे कि...
जब भी बैठूँ सिमरन में...
सतगुरू तू ही दिखाई दे.



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Tuesday, 7 July 2015




कहानी एक बार जरूर पड़े

एक बार मैं अपने एक मित्र का तत्काल केटेगरी में पासपोर्ट बनवाने पासपोर्ट ऑफिस गया था।
लाइन में लग कर हमने पासपोर्ट का तत्काल फार्म लिया, फार्म भर लिया, काफी समय हो चुका था अब हमें पासपोर्ट की फीस जमा करनी थी।
लेकिन जैसे ही हमारा नंबर आया बाबू ने खिड़की बंद कर दी और कहा कि समय खत्म हो चुका है अब कल आइएगा। 

मैंने उससे मिन्नतें की, उससे कहा कि आज पूरा दिन हमने खर्च किया है और बस अब केवल फीस जमा कराने की बात रह गई है, कृपया फीस ले लीजिए।
बाबू बिगड़ गया।
कहने लगा, "आपने पूरा दिन खर्च कर दिया तो उसके लिए वो जिम्मेदार है क्या?
अरे सरकार ज्यादा लोगों को बहाल करे।
मैं तो सुबह से अपना काम ही कर रहा हूं।" 

खैर, मेरा मित्र बहुत मायूस हुआ और उसने कहा कि चलो अब कल आएंगे।
मैंने उसे रोका, कहा कि रुको एक और कोशिश करता हूं।
बाबू अपना थैला लेकर उठ चुका था। मैंने कुछ कहा नहीं, चुपचाप उसके-पीछे हो लिया। वो एक कैंटीन में गया, वहां उसने अपने थैले से लंच बॉक्स निकाला और धीरे-धीरे अकेला खाने लगा। 

मैं उसके सामने की बेंच पर जाकर बैठ गया। मैंने कहा कि तुम्हारे पास तो बहुत काम है, रोज बहुत से नए-नए लोगों से मिलते होगे?
वो कहने लगा कि हां मैं तो एक से एक बड़े अधिकारियों से मिलता हूं।
कई आई.ए.एस., आई.पी.एस., विधायक रोज यहां आते हैं।
मेरी कुर्सी के सामने बड़े-बड़े लोग इंतजार करते हैं।

फिर मैंने उससे पूछा कि एक रोटी तुम्हारी प्लेट से मैं भी खा लूं?
उसने हाँ कहा।
मैंने एक रोटी उसकी प्लेट से उठा ली, और सब्जी के साथ खाने लगा।
मैंने उसके खाने की तारीफ की, और कहा कि तुम्हारी पत्नी बहुत ही स्वादिष्ट खाना पकाती है। 

मैंने उसे कहा तुम बहुत महत्वपूर्ण सीट पर बैठे हो। बड़े-बड़े लोग तुम्हारे पास आते हैं।
तो क्या तुम अपनी कुर्सी की इज्जत करते हो? तुम बहुत भाग्यशाली हो, तुम्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है, लेकिन तुम अपने पद की इज्जत नहीं करते।
उसने मुझसे पूछा कि ऐसा कैसे कहा आपने?

मैंने कहा कि जो काम दिया गया है उसकी इज्जत करते तो तुम इस तरह रुखे व्यवहार वाले नहीं होते।
देखो तुम्हारा कोई दोस्त भी नहीं है। तुम दफ्तर की कैंटीन में अकेले खाना खाते हो, अपनी कुर्सी पर भी मायूस होकर बैठे रहते हो, लोगों का होता हुआ काम पूरा करने की जगह अटकाने की कोशिश करते हो।

बाहर गाँव से आ कर सुबह से परेशान हो रहे लोगों के अनुरोध करने पर कहते हो,
"सरकार से कहो कि ज्यादा लोगों को बहाल करे।"
अरे ज्यादा लोगों के बहाल होने से तो तुम्हारी अहमियत घट जाएगी? हो सकता है तुमसे ये काम ही ले लिया जाए।

भगवान ने तुम्हें मौका दिया है रिश्ते बनाने के लिए।
लेकिन अपना दुर्भाग्य देखो, तुम इसका लाभ उठाने की जगह रिश्ते बिगाड़ रहे हो।
मेरा क्या है, कल आ जाउंगा या परसों आ जाउंगा।

पर तुम्हारे पास तो मौका था किसी को अपना अहसानमंद बनाने का। तुम उससे चूक गए।
मैंने कहा कि पैसे तो बहुत कमा लोगे, लेकिन रिश्ते नहीं कमाए तो सब बेकार है।
क्या करोगे पैसों का? अपना व्यवहार ठीक नहीं रखोगे तो तुम्हारे घर वाले भी तुमसे दुखी रहेंगे, यार दोस्त तो पहले से ही नहीं हे।

मेरी बात सुन कर वो रुंआसा हो गया।
उसने कहा कि आपने बात सही कही है साहब। मैं अकेला हूं।
पत्नी झगड़ा कर मायके चली गई है।
बच्चे भी मुझे पसंद नहीं करते।
मां है, वो भी कुछ ज्यादा बात नहीं करती।
सुबह चार-पांच रोटी बना कर दे देती है, और मैं तन्हा खाना खाता हूं। रात में घर जाने का भी मन नहीं करता।
समझ में नहीं आता कि गड़बड़ी कहां है? 

मैंने हौले से कहा कि खुद को लोगों से जोड़ो। किसी की मदद कर सकते तो तो करो।
देखो मैं यहां अपने दोस्त के पासपोर्ट के लिए आया हूं।
मेरे पास तो पासपोर्ट है। मैंने दोस्त की खातिर तुम्हारी मिन्नतें कीं। निस्वार्थ भाव से। इसलिए मेरे पास दोस्त हैं, तुम्हारे पास नहीं हैं। 

वो उठा और उसने मुझसे कहा कि आप मेरी खिड़की पर पहुंचो। मैं आज ही फार्म जमा करुंगा, और उसने काम कर दिया।
फिर उसने मेरा फोन नंबर मांगा, मैंने दे दिया।
बरसों बीत गए...
इस दिवाली पर एक फोन आया...
रविंद्र कुमार चौधरी बोल रहा हूं साहब, कई साल पहले आप हमारे पास अपने किसी दोस्त के पासपोर्ट के लिए आए थे, और आपने मेरे साथ रोटी भी खाई थी।
आपने कहा था कि पैसे की जगह रिश्ते बनाओ। 
मुझे एकदम याद आ गया।
मैंने कहा हां जी चौधरी साहब कैसे हैं?

उसने खुश होकर कहा, "साहब आप उस दिन चले गए, फिर मैं बहुत सोचता रहा।
मुझे लगा कि पैसे तो सचमुच बहुत लोग दे जाते हैं, लेकिन साथ खाना खाने वाला कोई नहीं मिलता।
मैं साहब अगले ही दिन पत्नी के मायके गया, बहुत मिन्नतें कर उसे घर लाया।
वो मान ही नहीं रही थी,
वो खाना खाने बैठी तो मैंने उसकी प्लेट से एक रोटी उठा ली, कहा कि साथ खिलाओगी?
वो हैरान थी। रोने लगी।
मेरे साथ चली आई।
बच्चे भी साथ चले आए।

साहब,
अब मैं पैसे नहीं कमाता।
रिश्ते कमाता हूं।
जो आता है उसका काम कर देता हूं। 

साहब आज आपको हैप्पी दिवाली बोलने के लिए फोन किया है।
अगले महीने बिटिया की शादी है।
आपको आना है।
बिटिया को आशीर्वाद देने।
रिश्ता जोड़ा है आपने।

वो बोलता जा रहा था,
मैं सुनता जा रहा था। सोचा नहीं था कि सचमुच उसकी ज़िंदगी में भी पैसों पर रिश्ता इतना भारी पड़ेगा। 

दोस्तों
आदमी भावनाओं से
संचालित होता है।
कारणों से नहीं।
कारण से तो मशीनें चला करती है ।

Kisi dost ne bheji hai. Dil ko choo gayi isliye apko bhej raha hoon Achhi lage to aap bhi shear kare...
मुझे नही पता कि
मैं एक बेहतरीन दोस्त हूँ या नही
लेकिन
.
मुझे पूरा यकीन है कि
जिनके साथ मेरी दोस्ती है
वे बहुत बेहतरीन है।


दिल छुने वाली कहानि...
एक बार की बात है एक जंगल में सेब
का एक बड़ा पेड़ था| एक बच्चा रोज उस पेड़
पर खेलने आया करता था| वह कभी पेड़ की
डाली से लटकता कभी फल
तोड़ता कभी उछल कूद करता था, सेब
का पेड़ भी उस बच्चे से काफ़ी खुश रहता
था| कई साल इस तरह बीत गये| अचानक एक दिन
बच्चा कहीं चला गया और फिर लौट के नहीं
आया, पेड़ ने उसका काफ़ी इंतज़ार किया पर
वहनहीं आया| अब तो पेड़ उदासहो गया ।
काफ़ी साल बाद वह बच्चा फिर से पेड़ के
पास आया पर वह अब कुछ बड़ा हो गया था| पेड़
उसे देखकर काफ़ी खुश हुआ और उसे अपने साथ
खेलने के लिए कहा| पर बच्चा उदास होते हुए
बोला कि अब वह बड़ा हो गया है अब वह उसके
साथ नहीं खेल सकता| बच्चा बोला की अब
मुझे खिलोने से खेलना अच्छा लगता है पर
मेरे पास खिलोने खरीदने के लिए पैसे नहीं
है| पेड़ बोला उदास ना हो तुम मेरे फल तोड़
लो और उन्हें बेच कर खिलोने खरीद लो|
बच्चा खुशी खुशी फल तोड़ के ले गया लेकिन
वह फिर बहुत दिनों तक वापस नहीं आया| पेड़
बहुत दुखी हुआ| अचानक बहुत दिनों बाद
बच्चा जो अब जवान हो गया था वापस आया,
पेड़ बहुत खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने
के लिए कहा पर लड़के
ने कहा कि वह पेड़ के साथ नहीं खेल सकता
अब मुझे कुछ पैसे चाहिए क्यूंकी मुझे अपने
बच्चों के लिए घर बनाना है| पेड़ बोला मेरी
शाखाएँ बहुत मजबूत हैं
तुम इन्हें काट कर ले जाओ और अपना घर
बना लो| अब लड़के ने खुशी खुशी सारी
शाखाएँ काट डालीं और लेकर चला गया|
वह फिर कभी वापस नहीं आया|
बहुत दिनों बात जब वह वापिस आया तो बूढ़ा
हो चुका था पेड़ बोला मेरे साथ खेलो पर वह
बोला की अब में बूढ़ा हो गया हूँ अब नहीं
खेल सकता| पेड़ उदास होते हुए
बोला की अब मेरे पास ना फल हैं और
ना ही लकड़ी अब में तुम्हारी मदद
भी नहीं कर सकता| बूढ़ा बोला की अब उसे
कोई सहायता नहीं चाहिए बस एक
जगह चाहिए जहाँ वह बाकी जिंदगी आराम से
गुजर सके| पेड़ ने उसे अपने जड़ मे पनाह दी
और बूढ़ा हमेशा वहीं रहने लगा|
मित्रों इसी पेड़ की तरह हमारे माता पिता
भी होते हैं, जब हम छोटे होते हैं तो उनके
साथ खेलकर बड़े होते हैं और बड़े होकर
उन्हें छोड़ कर चले जाते हैं और तभी वापस
आते हैं ,जब हमें कोई ज़रूरत होती है|
धीरे धीरे ऐसे ही जीवन बीत जाता है| हमें
पेड रूपी माता पिता की सेवा करनी चाहिए
नाकी सिर्फ़ उनसे
फ़ायदा लेना चाहिए।
आपको ये कहानी कैसी लगी. हमे comments
में जरुर बताये.

                                                          बचपन

बचपन मे 1 रु. की पतंग के पीछे
२ की.मी. तक भागते थे...
न जाने कीतने चोटे लगती थी...
वो पतंग भी हमे बहोत दौड़ाती थी...
आज पता चलता है,
दरअसल वो पतंग नहीं थी;
एक चेलेंज थी...
खुशीओं को हांसिल करने के लिए दौड़ना पड़ता है...
वो दुकानो पे नहीं मिलती...
शायद यही जिंदगी की दौड़ है ...!!!


जब बचपन था, तो जवानी एक ड्रीम था...
जब जवान हुए, तो बचपन एक ज़माना था... !!
जब घर में रहते थे, आज़ादी अच्छी लगती थी...
आज आज़ादी है, फिर भी घर जाने की जल्दी रहती है... !!
कभी होटल में जाना पिज़्ज़ा, बर्गर खाना पसंद था...
आज घर पर आना और माँ के हाथ का खाना पसंद है... !!!
स्कूल में जिनके साथ ज़गड़ते थे, आज उनको ही इंटरनेट पे तलाशते है... !!
ख़ुशी किसमे होतीं है, ये पता अब चला है...
बचपन क्या था, इसका एहसास अब हुआ है...
काश बदल सकते हम ज़िंदगी के कुछ साल..
.काश जी सकते हम, ज़िंदगी फिर एक बार...!!

जब हम अपने शर्ट में हाथ छुपाते थे
और लोगों से कहते फिरते थे देखो मैंने
अपने हाथ जादू से हाथ गायब कर दिए

✏जब हमारे पास चार रंगों से लिखने
वाली एक पेन हुआ करती थी और हम
सभी के बटन को एक साथ दबाने
की कोशिश किया करते थे |

जब हम दरवाज़े के पीछे छुपते थे
ताकि अगर कोई आये तो उसे डरा सके..👥

जब आँख बंद कर सोने का नाटक करते
थे ताकि कोई हमें गोद में उठा के बिस्तर तक पहुचा दे |

सोचा करते थे की ये चाँद
हमारी साइकिल के पीछे पीछे
क्यों चल रहा हैं |

On/Off वाले स्विच को बीच में
अटकाने की कोशिश किया करते थे |

फल के बीज को इस डर से नहीं खाते
थे की कहीं हमारे पेट में पेड़ न उग जाए |

बर्थडे सिर्फ इसलिए मनाते थे
ताकि ढेर सारे गिफ्ट मिले |
फ्रिज को धीरे से बंद करके ये जानने
की कोशिश करते थे की इसकी लाइट
कब बंद होती हैं |

सच , बचपन में सोचते हम बड़े
क्यों नहीं हो रहे ?
और अब सोचते हम बड़े क्यों हो गए ?

ये दौलत भी ले लो..ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी...
मगर मुझको लौटा दो बचपन
का सावन ....

वो कागज़
की कश्ती वो बारिश का पानी..

बचपन कि ये लाइन्स .
जिन्हे हम दिल से गाते
गुनगुनाते थे ..
और खेल खेलते थे ..!!
तो याद ताज़ा कर लीजिये ...!!
▶ मछली जल की रानी है,
जीवन उसका पानी है।
हाथ लगाओ डर जायेगी
बाहर निकालो मर जायेगी।
************
▶ पोशम्पा भाई पोशम्पा,
सौ रुपये की घडी चुराई।
अब तो जेल मे जाना पडेगा,
जेल की रोटी खानी पडेगी,
जेल का पानी पीना पडेगा।
थै थैयाप्पा थुशमदारी बाबा खुश।
************
▶ आलू-कचालू बेटा कहाँ गये थे,
बन्दर की झोपडी मे सो रहे थे।
बन्दर ने लात मारी रो रहे थे,
मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे।
**************
▶ आज सोमवार है,
चूहे को बुखार है।
चूहा गया डाक्टर के पास,
डाक्टर ने लगायी सुई,
चूहा बोला उईईईईई।
************
▶ झूठ बोलना पाप है,
नदी किनारे सांप है।
काली माई आयेगी,
तुमको उठा ले जायेगी।
************
▶ चन्दा मामा दूर के,
पूए पकाये भूर के।
आप खाएं थाली मे,
मुन्ने को दे प्याली में।
************
▶ तितली उड़ी,
बस मे चढी।
सीट ना मिली,
तो रोने लगी।
ड्राईवर बोला,
आजा मेरे पास,
तितली बोली ” हट बदमाश “।
******************
▶ मोटू सेठ,
पलंग पर लेट ,
गाडी आई,
फट गया पेट
********************

आज सब अपना बचपन याद करो


पापा का प्यार
बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया ..

इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया
मैं आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ...

जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है .....
आज मैं पापा का पर्स भी उठा लाया था .... जिसे किसी को हाथ तक न लगाने देते थे ...

मुझे पता है इस पर्स मैं जरुर पैसो के हिसाब की डायरी होगी ....
पता तो चले कितना माल छुपाया है .....
माँ से भी ...

इसीलिए हाथ नहीं लगाने देते किसी को..

जैसे ही मैं कच्चे रास्ते से सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है ....
मैंने जूता निकाल कर देखा .....
मेरी एडी से थोडा सा खून रिस आया था ...
जूते की कोई कील निकली हुयी थी, दर्द तो हुआ पर गुस्सा बहुत था ..

और मुझे जाना ही था घर छोड़कर ...

जैसे ही कुछ दूर चला ....
मुझे पांवो में गिला गिला लगा, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था ....
पाँव उठा के देखा तो जूते का तला टुटा था .....

जैसे तेसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक कोई बस नहीं थी .....

मैंने सोचा क्यों न पर्स की तलाशी ली जाये ....

मैंने पर्स खोला, एक पर्ची दिखाई दी, लिखा था..
लैपटॉप के लिए 40 हजार उधार लिए
पर लैपटॉप तो घर मैं मेरे पास है ?

दूसरा एक मुड़ा हुआ पन्ना देखा, उसमे उनके ऑफिस की किसी हॉबी डे का लिखा था
उन्होंने हॉबी लिखी अच्छे जूते पहनना ......
ओह....अच्छे जुते पहनना ???
पर उनके जुते तो ...........!!!!

माँ पिछले चार महीने से हर पहली को कहती है नए जुते ले लो ...
और वे हर बार कहते "अभी तो 6 महीने जूते और चलेंगे .."
मैं अब समझा कितने चलेंगे

......तीसरी पर्ची ..........
पुराना स्कूटर दीजिये एक्सचेंज में नयी मोटर साइकिल ले जाइये ...
पढ़ते ही दिमाग घूम गया.....
पापा का स्कूटर .............
ओह्ह्ह्ह

मैं घर की और भागा........
अब पांवो में वो कील नही चुभ रही थी ....

मैं घर पहुंचा .....
न पापा थे न स्कूटर ..............
ओह्ह्ह नही
मैं समझ गया कहाँ गए ....

मैं दौड़ा .....
और
एजेंसी पर पहुंचा......
पापा वहीँ थे ...............

मैंने उनको गले से लगा लिया, और आंसुओ से उनका कन्धा भिगो दिया ..

.....नहीं...पापा नहीं........ मुझे नहीं चाहिए मोटर साइकिल...

बस आप नए जुते ले लो और मुझे अब बड़ा आदमी बनना है..

वो भी आपके तरीके से ...।।

"माँ" एक ऐसी बैंक है जहाँ आप हर भावना और दुख जमा कर सकते है...

और

"पापा" एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिनके पास बैलेंस न होते हुए भी हमारे सपने पूरे करने की कोशिश करते है..
I Love You Papa



बहुत सुन्दर शब्द जो एक गुरुद्वारे के दरवाज़े पर लिखे थे :
यार से ऐसी यारी रख
दुःख में भागीदारी रख,
चाहे लोग कहे कुछ भी
तू तो जिम्मेदारी रख,
वक्त पड़े काम आने का
पहले अपनी बारी रख,
मुसीबते तो आएगी
पूरी अब तैयारी रख,
कामयाबी मिले ना मिले
जंग हौंसलों की जारी रख,
बोझ लगेंगे सब हल्के
मन को मत भारी रख,
मन जीता तो जग जीता
कायम अपनी खुद्दारी रख.
सुप्रभात


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