Friday, 28 August 2015

उसकी धाक.. एक-दो पे नहीं , सैंकड़ों पे थी| और गिनती भी उसकी शहर के बड़ों बड़ों में थी| दफन.. केवल..छ: फिट के गड्डे में कर दिया उसको ! जबकि.... ज़मीन उसके नाम तो कई एकड़ों में थी....||


Gyan Ki Baatein


1:- इस बात को व्यक्त मत होने दीजिये कि आपने क्या करने के लिए सोचा है, बुद्धिमानी से इसे रहस्य बनाये रखिए और इस काम को करने के लिए दृढ रहिए। -

2:- शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पता है। शिक्षा सौंदर्य और यौवन को परास्त कर देती है।

3:- मूर्खता के समान यौवन भी दुखदायी होता है क्योंकि जवानी में व्यक्ति कामवासना के आवेग में कोई भी मूर्खतापूर्ण कार्य कर सकता है। परंतु इनसे भी अधिक कष्टदायक है दूसरों पर आश्रित रहना। 

4:- अगर सांप जहरीला ना भी हो तो उसे खुद को जहरीला दिखाना चाहिए। 

5:- वे माता-पिता अपने बच्चों के लिए शत्रु के समान हैं, जिन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दी। क्योंकि अनपढ़ बालक का विद्वानों के समूह में उसी प्रकार अपमान होता है जैसे हंसों के झुंड में बगुले की स्थिति होती है। 

6:- चाणक्य के अनुसार नदी के किनारे स्थित वृक्षों का जीवन अनिश्चित होता है, क्योंकि नदियाँ बाढ़ के समय अपने किनारे के पेड़ों को उजाड़ देती हैं। इसी प्रकार दूसरे के घरों में रहने वाली स्त्री भी किसी समय पतन के मार्ग पर जा सकती है। इसी तरह जिस राजा के पास अच्छी सलाह देने वाले मंत्री नहीं होते, वह भी बहुत समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसमें जरा भी संदेह नहीं करना चाहिए। 

7:- जिस तरह वेश्या धन के समाप्त होने पर पुरुष से मुँह मोड़ लेती है। उसी तरह जब राजा शक्तिहीन हो जाता है तो प्रजा उसका साथ छोड़ देती है। इसी प्रकार वृक्षों पर रहने वाले पक्षी भी तभी तक किसी वृक्ष पर बसेरा रखते हैं, जब तक वहाँ से उन्हें फल प्राप्त होते रहते हैं। अतिथि का जब पूरा स्वागत-सत्कार कर दिया जाता है तो वह भी उस घर को छोड़ देता है। 

8:- जिस प्रकार पत्नी के वियोग का दुख, अपने भाई-बंधुओं से प्राप्त अपमान का दुख असहनीय होता है, उसी प्रकार कर्ज से दबा व्यक्ति भी हर समय दुखी रहता है। दुष्ट राजा की सेवा में रहने वाला नौकर भी दुखी रहता है। 

9:- जिस व्यक्ति का पुत्र उसके नियंत्रण में रहता है, जिसकी पत्नी आज्ञा के अनुसार आचरण करती है और जो व्यक्ति अपने कमाए धन से पूरी तरह संतुष्ट रहता है। ऐसे मनुष्य के लिए यह संसार ही स्वर्ग के समान है।

10:- भोजन के लिए अच्छे पदार्थों का उपलब्ध होना, उन्हें पचाने की शक्ति का होना, सुंदर स्त्री के साथ संसर्ग के लिए कामशक्ति का होना, प्रचुर धन के साथ-साथ धन देने की इच्छा होना। ये सभी सुख मनुष्य को बहुत कठिनता से प्राप्त होते हैं। 




एक फकीर ने एक कुत्ते से पूछा कि तू है तो बहुत वफादार,, परन्तु तेरे में तीन कमियां हैं । 1-- तू पेशाब हमेशा दीवार पे ही करता है । 2-- तू फकीर को देखकर बिना बात के ही भौंकता है । 3-- तू रात को भौंक भौंक के लोगों की नींद खराब करता है । इस पर कुत्ते ने बहुत ही बढिया जवाब दिया,,, कुत्ता बोला ऐ बंदे सुन 1-- जमीन पर पेशाब इस लिए नहीं करता की कही किसी रब्ब के बंदे ने वहां बैठकर रब्ब को सज्जदा न किया हो । 2-- फकीर पर इस लिए भौंकता हूँ कि वोह भगवान को छोड कर लोगों से क्यों मांगता है,, जोकि खुद भीखारी हैं । भगवान से क्यों नहीं मांगता । 3-- और रात को इस लिए भौंकता हूँ कि हे पापी इंसान तू गफलत की नींद में क्यों सोया हुआ है। उठ अपने उस प्रभू को याद कर जिसने तुझे इतना सब कुछ दिया है ।



जंगल में नदी किनारे बहुत पुराना एक बरगद का पेड़ था । उस वृक्ष की हरी-भरी डालियों, हरे-हरे पत्तों को देखकर राहगीरों की आंखों को ठंडक पहुंचती थी।
थोड़ी दूर पर आम, जामुन, अमरुद और अनार के पेड़ भी थे। उस जंगल के सभी पेड़-पौधे बरगद दादा का बड़ा सम्मान करते थे ।
बरगद की छाया में थके हुए मुसाफिर अक्सर आराम करते थे। एक दिन एक राहगीर उस बरगद के नीचे आराम करने बैठा। सारा दिन धूप में पैदल चलने से वह थक गया था। हवा के झोंके उसके थके शरीर को आराम पहुंचा रहे थे।
उसे नींद आने लगी। वह सोने के लिए लेटा ही था कि अचानक उसकी निगाह बरगद की टहनियों पर पड़ी। वह राहगीर थोड़ा घमंडी था। जब उसने बरगद के छोटे-छोटे फलों को देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ। इतने बड़े पेड़ के इतने छोटे-छोटे से फूल और फल ?
राहगीर तिरस्कार से बोला। कुछ देर सोचने के बाद उसने हंसते हुए कहा, ‘‘सब कहते हैं कि यह पेड़ बहुत बुद्धिमान है अगर इसके फल इतने छोटे-छोटे हैं तो यह समझदार कैसे हो सकता है। ’’बरगद का पेड़ सारी बात सुनने के बाद भी चुप रहा।
उसने अपने पत्ते हिलाकर हवा की। राहगीर जल्द ही खर्राटे भरने लगा। तभी ‘टप’ से एक छोटा-सा फल राहगीर पर गिरा। वह एकदम झटके से उठा। ‘‘हूं जब मुझे नींद आ रही थी तभी यह होना था।’’ राहगीर फल उठाते हुए बड़बड़ाया ।
‘‘चोट लगी क्या ?’’ बरगद ने मुस्कुराते हुए पूछा ।‘‘नहीं पर तुमने मेरी नींद तोड़ दी।’’ राहगीर ने आंख मलते हुए कहा। ‘‘इसे घमंडी राहगीर के लिए एक सबक समझो।
तुम मुझ पर इसीलिए हंसे थे न कि मेरे फल छोटे हैं।’’ बरगद ने हंसते हुए कहा।
राहगीर गुस्से से कहा, ‘‘हां मैं हंसा था। न जाने लोग क्यों तुम्हें समझदार समझते हैं ? सोते लोगों को जगाना क्या समझदारी है?’’
बरगद फिर हंसा और बोला, ‘‘मेरे दोस्त, घमंड करना कोई बुद्धिमानी नहीं है। मेरे पत्ते तुम्हें आराम करने के लिए छाया व हवा दे रहे हैं। हां मेरे फल जरूर छोटे हैं ।
अगर मेरा फल नारियल जितना बड़ा होता और वह तुम्हारे सिर पर गिरा होता तो सोचो तुम्हारे सिर का क्या हाल होता।
’’राहगीर यह सुनकर चुप हो गया। उसने इस बारे में तो सोचा ही न था। ‘‘जो लोग बुद्धिमान होते हैं वे अपने आसपास की चीजों को देखकर भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।’’ बरगद ने धीरे से कहा।
राहगीर ने बरगद से माफी मांगते हुए कहा, ‘‘मुझे माफ कर दीजिए। मुझे सब समझ आ गया और आज मुझे सीख भी मिल गई।
मैं वायदा करता हूं कि आगे कभी भी घमंड नहीं करूंगा और छोटे-बड़े का भेदभाव मन में नहीं पालूंगा।’’


SANSKRIT

इसाइयों को इंग्लिश आती है तो वे ‪#‎बाइबल‬ पढ़ लेते है...
उसी प्रकार मुस्लिमों को उर्दू आती है तो वे ‪#‎कुरान‬ पढ़
लेते है...
सिखों को पंजाबी आती है तो वे ‪#‎गुरुग्रंथ‬ पढ़ लेते है...
हिन्दुओ को संस्कृत आती नही और वे न ‪#‎वेद‬ पढ़ पाते है न
‪#‎उपनिषद‬...
इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा किसी धर्म का ??
देश की परम्परागत संस्कृति के लिए यह एक बड़ी और
अफसोसनाक घटना है.
क्या इसकी एक वजह हिंदू समाज द्वारा संस्कृत भाषा के
प्रति बढ़ती वितृष्णा ही नहीं है?
इस देश में आज संस्कृत भाषा भाषियों की तादाद कुल बावन
हजार है.
लगभग एक सौ बीस करोड़ में कुल बावन हजार संस्कृत
भाषा भाषी !
आखिर हम अपनी किस महान संस्कृति पर गर्व करते हैं?
किस महानता पर मुग्ध होते हैं?
संस्कृत भाषा और साहित्य इस देश के हिंदू समाज
का महत्वपूर्ण अतीत है.
वेदों से लेकर रामायण, महाभारत के
अलावा पुराण तथा काव्य साहित्य संस्कृत में ही रहा है.
लेकिन विचित्र बात है कि समूचे देश में
वाराणसी जैसे एकाध स्थानों को छोड़ कर ‪#‎संस्कृत‬ भाषा में
लिखने-पढ़ने वाले लोग
बिरले ही मिलेंगे..



एक बार जंगल में एक बहुत बड़े से गड्ढे में एक शेर गिर गया ।
परेशान होकर शेर यहाँ वहां देखने लगा पर उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था ।
तभी वहां एक पेड़ में एक बन्दर आ गया , शेर को इस हाल में फंसा देखकर बन्दर , शेर का मजाक उडाने लगा , " क्यों शेर तू तो राजा बना फिरता है , अब तो तेरी अकल ठिकाने आ गयी न,
अब शिकारी तुझे मारेंगे , तेरी खाल निकालकर दीवार पर सजायेंगे, तेरे नाखून और दांत निकाल कर दवाई बनायेंगे ।
हँसमुखी चैनल पर तेरी न्यूज़ दिखाई जाएगी ?
तभी वो डाल जिसमें बन्दर बैठा था ,टूट गयी और बन्दर सीधे शेर के सामने आ गिरा ।
गिरते ही बोला " माँ कसम दादा माफ़ी मांगने के लिए कूदा हूँ !
हा हा हा !
वक़्त किसी का नहीं होता अगर आज आपका वक़्त है तो कल हमारा भी होगा है..

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